आज Lunglei जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां



नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज मिज़ोरम राज्य के Lunglei जिले में पपीता के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप मिज़ोरम की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।

Lunglei में पपीता मंडी भाव का सारांश

कमोडिटी Papaya पपीता
औसत भाव ₹3,000 क्विंटल
न्यूनतम भाव ₹3,000 क्विंटल ( Super Market Lungli (Bara Bazar) )
अधिकतम भाव ₹6,000 क्विंटल ( Super Market Lungli (Bara Bazar) )
* यह सारांश 1 मंडियो के पिछले एक सप्ताह के भाव से लिया गया है।

ताज़ा जानकारी के अनुसार, मिज़ोरम राज्य के Lunglei जिले की मंडियो में पपीता का औसतन भाव ₹3,000 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव Super Market Lungli (Bara Bazar) मंडी में ₹3,000 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव Super Market Lungli (Bara Bazar) मंडी में ₹6,000 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर मिज़ोरम राज्य के Lunglei जिले की 1 मंडियो के पपीता के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 30 सितंबर 2019 को अपडेट किया गया है।

पपीता भाव

आज Lunglei जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां

कमोडिटी ज़िला मंडी पपीता भाव अप्डेट
पपीता Lungli Super Market Lungli (Bara Bazar) (Super Market Lungli (Bara Bazar)) 3000 से 6000 ₹क्विंटल 30 Sep 2019

Notes*

  • सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
  • भाव में परिवर्तन हो सकता है।
  • ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं

पपीता एक फल है जो हर मौसम मे उपलब्ध होता है। पपीता गोलाकर या नाशपति के आकार का होता है। यह फल बड़ा 50-60CM व्यास का व अंदर से खोखला होता है। आमतोर पर यह ½ से 2 किलो का होता है इसके अंदर खोखले भाग मे काले बीज होते है। पपीता पहले हरा और पकते समय नारंगी व चमकिले पाइल रंग का हो जाता है। 

पपीता मे विटामिन ए, बी ,डी और कैल्शियम, आयरन व प्रोटिन अधिक मात्रा मे मिलते है। पपीता स्कीन के लिए फायदेमंद है। यह हाई- पगमेंटस को काम करने मे मदद करता है मुहासो को भी कम करने मे मदद करता है। पपीता स्कीन को हाइड्रेट रखता है।

पपीता उत्पादन करने वाले राज्य

भारत मे पपीता उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य उतर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल है। यहा सालाना 2628.9 हजार मैट्रिक टन उत्पादन दर्ज की गया है। उतरी राज्यो मे यह फसल डेढ़ साल व दक्षिण राज्य मे एक साल मे फल देना शुरू हो जाता है।