आज अलवर जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां
नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज राजस्थान राज्य के अलवर जिले में पपीता के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप राजस्थान की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।
ताज़ा जानकारी के अनुसार, राजस्थान राज्य के अलवर जिले की मंडियो में पपीता का औसतन भाव ₹2,000 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव अलवर मंडी में ₹2,000 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव अलवर मंडी में ₹3,000 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर राजस्थान राज्य के अलवर जिले की 7 मंडियो के पपीता के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 26 फरवरी 2026 को अपडेट किया गया है।
आज अलवर जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां
| कमोडिटी | ज़िला | मंडी | पपीता भाव | अप्डेट |
|---|---|---|---|---|
| पपीता | अलवर | अलवर (Alwar) | 2000 से 3000 ₹क्विंटल | 26 Feb 2026 |
| पपीता | अलवर | Alwar FV (Alwar FV) | 2400 से 3500 ₹क्विंटल | 3 Nov 2025 |
| पपीता | अलवर | Alwar (F&V) (Alwar (F&V)) | 2400 से 3500 ₹क्विंटल | 3 Nov 2025 |
| पपीता | अलवर | अलवर (फल व सब्जी ) (Alwar (F&V)) | 2000 से 2400 ₹क्विंटल | 12 Jan 2024 |
| पपीता | अलवर | Alwar (F&V) (Alwar (F&V)) | 800 से 1200 ₹क्विंटल | 13 Apr 2015 |
| पपीता | अलवर | अलवर (Alwar) | 1200 से 1800 ₹क्विंटल | 2 Apr 2014 |
| पपीता | अलवर | Alwar (F&V) (Alwar (F&V)) | 700 से 800 ₹क्विंटल | 26 Feb 2007 |
Notes*
- सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
- भाव में परिवर्तन हो सकता है।
- ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं
पपीता एक फल है जो हर मौसम मे उपलब्ध होता है। पपीता गोलाकर या नाशपति के आकार का होता है। यह फल बड़ा 50-60CM व्यास का व अंदर से खोखला होता है। आमतोर पर यह ½ से 2 किलो का होता है इसके अंदर खोखले भाग मे काले बीज होते है। पपीता पहले हरा और पकते समय नारंगी व चमकिले पाइल रंग का हो जाता है।
पपीता मे विटामिन ए, बी ,डी और कैल्शियम, आयरन व प्रोटिन अधिक मात्रा मे मिलते है। पपीता स्कीन के लिए फायदेमंद है। यह हाई- पगमेंटस को काम करने मे मदद करता है मुहासो को भी कम करने मे मदद करता है। पपीता स्कीन को हाइड्रेट रखता है।
पपीता उत्पादन करने वाले राज्य
भारत मे पपीता उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य उतर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल है। यहा सालाना 2628.9 हजार मैट्रिक टन उत्पादन दर्ज की गया है। उतरी राज्यो मे यह फसल डेढ़ साल व दक्षिण राज्य मे एक साल मे फल देना शुरू हो जाता है।