आज दक्षिण गोवा जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां



नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज गोवा राज्य के दक्षिण गोवा जिले में पपीता के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप गोवा की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।

दक्षिण गोवा में पपीता मंडी भाव का सारांश

कमोडिटी Papaya पपीता
औसत भाव ₹592 क्विंटल
न्यूनतम भाव ₹300 क्विंटल ( Margao )
अधिकतम भाव ₹1,650 क्विंटल ( Margao )
* यह सारांश 3 मंडियो के पिछले एक सप्ताह के भाव से लिया गया है।

ताज़ा जानकारी के अनुसार, गोवा राज्य के दक्षिण गोवा जिले की मंडियो में पपीता का औसतन भाव ₹592 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव Margao मंडी में ₹300 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव Margao मंडी में ₹1,650 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर गोवा राज्य के दक्षिण गोवा जिले की 3 मंडियो के पपीता के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 3 सितंबर 2002 को अपडेट किया गया है।

पपीता भाव

आज दक्षिण गोवा जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां

कमोडिटी ज़िला मंडी पपीता भाव अप्डेट
पपीता दक्षिण गोवा Margao (Margao) 300 से 400 ₹क्विंटल 3 Sep 2002
पपीता दक्षिण गोवा Margao (Margao) 1100 से 1650 ₹क्विंटल 5 Aug 2002
पपीता दक्षिण गोवा Margao (Margao) 375 से 525 ₹क्विंटल 8 Sep 2001

Notes*

  • सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
  • भाव में परिवर्तन हो सकता है।
  • ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं

पपीता एक फल है जो हर मौसम मे उपलब्ध होता है। पपीता गोलाकर या नाशपति के आकार का होता है। यह फल बड़ा 50-60CM व्यास का व अंदर से खोखला होता है। आमतोर पर यह ½ से 2 किलो का होता है इसके अंदर खोखले भाग मे काले बीज होते है। पपीता पहले हरा और पकते समय नारंगी व चमकिले पाइल रंग का हो जाता है। 

पपीता मे विटामिन ए, बी ,डी और कैल्शियम, आयरन व प्रोटिन अधिक मात्रा मे मिलते है। पपीता स्कीन के लिए फायदेमंद है। यह हाई- पगमेंटस को काम करने मे मदद करता है मुहासो को भी कम करने मे मदद करता है। पपीता स्कीन को हाइड्रेट रखता है।

पपीता उत्पादन करने वाले राज्य

भारत मे पपीता उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य उतर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल है। यहा सालाना 2628.9 हजार मैट्रिक टन उत्पादन दर्ज की गया है। उतरी राज्यो मे यह फसल डेढ़ साल व दक्षिण राज्य मे एक साल मे फल देना शुरू हो जाता है।