आज करनाल जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां



नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज हरियाणा राज्य के करनाल जिले में पपीता के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप हरियाणा की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।

करनाल में पपीता मंडी भाव का सारांश

कमोडिटी Papaya पपीता
औसत भाव ₹1,350 क्विंटल
न्यूनतम भाव ₹900 क्विंटल ( इन्द्री )
अधिकतम भाव ₹1,800 क्विंटल ( निस्सिंग )
* यह सारांश 2 मंडियो के पिछले एक सप्ताह के भाव से लिया गया है।

ताज़ा जानकारी के अनुसार, हरियाणा राज्य के करनाल जिले की मंडियो में पपीता का औसतन भाव ₹1,350 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव इन्द्री मंडी में ₹900 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव निस्सिंग मंडी में ₹1,800 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर हरियाणा राज्य के करनाल जिले की 2 मंडियो के पपीता के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 10 अप्रैल 2014 को अपडेट किया गया है।

पपीता भाव

आज करनाल जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां

कमोडिटी ज़िला मंडी पपीता भाव अप्डेट
पपीता करनाल निस्सिंग (Nissing) 1800 से 1800 ₹क्विंटल 10 Apr 2014
पपीता करनाल इन्द्री (Indri) 900 से 1000 ₹क्विंटल 15 Jan 2009

Notes*

  • सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
  • भाव में परिवर्तन हो सकता है।
  • ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं

पपीता एक फल है जो हर मौसम मे उपलब्ध होता है। पपीता गोलाकर या नाशपति के आकार का होता है। यह फल बड़ा 50-60CM व्यास का व अंदर से खोखला होता है। आमतोर पर यह ½ से 2 किलो का होता है इसके अंदर खोखले भाग मे काले बीज होते है। पपीता पहले हरा और पकते समय नारंगी व चमकिले पाइल रंग का हो जाता है। 

पपीता मे विटामिन ए, बी ,डी और कैल्शियम, आयरन व प्रोटिन अधिक मात्रा मे मिलते है। पपीता स्कीन के लिए फायदेमंद है। यह हाई- पगमेंटस को काम करने मे मदद करता है मुहासो को भी कम करने मे मदद करता है। पपीता स्कीन को हाइड्रेट रखता है।

पपीता उत्पादन करने वाले राज्य

भारत मे पपीता उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य उतर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल है। यहा सालाना 2628.9 हजार मैट्रिक टन उत्पादन दर्ज की गया है। उतरी राज्यो मे यह फसल डेढ़ साल व दक्षिण राज्य मे एक साल मे फल देना शुरू हो जाता है।