आज Mandya जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां



नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज कर्नाटक राज्य के Mandya जिले में पपीता के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप कर्नाटक की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।

Mandya में पपीता मंडी भाव का सारांश

कमोडिटी Papaya पपीता
औसत भाव ₹560 क्विंटल
न्यूनतम भाव ₹100 क्विंटल ( Maddur )
अधिकतम भाव ₹1,300 क्विंटल ( Nagamangala )
* यह सारांश 5 मंडियो के पिछले एक सप्ताह के भाव से लिया गया है।

ताज़ा जानकारी के अनुसार, कर्नाटक राज्य के Mandya जिले की मंडियो में पपीता का औसतन भाव ₹560 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव Maddur मंडी में ₹100 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव Nagamangala मंडी में ₹1,300 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर कर्नाटक राज्य के Mandya जिले की 5 मंडियो के पपीता के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 18 मई 2019 को अपडेट किया गया है।

पपीता भाव

आज Mandya जिले में पपीता का मंडी भाव - सभी मंडियां

कमोडिटी ज़िला मंडी पपीता भाव अप्डेट
पपीता Mandya Maddur (Maddur) 600 से 600 ₹क्विंटल 18 May 2019
पपीता Mandya Nagamangala (Nagamangala) 700 से 700 ₹क्विंटल 9 Jun 2016
पपीता Mandya Nagamangala (Nagamangala) 1000 से 1300 ₹क्विंटल 8 Jan 2014
पपीता Mandya Maddur (Maddur) 400 से 400 ₹क्विंटल 27 Sep 2013
पपीता Mandya Maddur (Maddur) 100 से 100 ₹क्विंटल 23 Nov 2009

Notes*

  • सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
  • भाव में परिवर्तन हो सकता है।
  • ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं

पपीता एक फल है जो हर मौसम मे उपलब्ध होता है। पपीता गोलाकर या नाशपति के आकार का होता है। यह फल बड़ा 50-60CM व्यास का व अंदर से खोखला होता है। आमतोर पर यह ½ से 2 किलो का होता है इसके अंदर खोखले भाग मे काले बीज होते है। पपीता पहले हरा और पकते समय नारंगी व चमकिले पाइल रंग का हो जाता है। 

पपीता मे विटामिन ए, बी ,डी और कैल्शियम, आयरन व प्रोटिन अधिक मात्रा मे मिलते है। पपीता स्कीन के लिए फायदेमंद है। यह हाई- पगमेंटस को काम करने मे मदद करता है मुहासो को भी कम करने मे मदद करता है। पपीता स्कीन को हाइड्रेट रखता है।

पपीता उत्पादन करने वाले राज्य

भारत मे पपीता उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य उतर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल है। यहा सालाना 2628.9 हजार मैट्रिक टन उत्पादन दर्ज की गया है। उतरी राज्यो मे यह फसल डेढ़ साल व दक्षिण राज्य मे एक साल मे फल देना शुरू हो जाता है।