आज Narsinghpur जिले में तिल का मंडी भाव - सभी मंडियां
नमस्कार दोस्तों, मंडी भाव इंडिया में आपका स्वागत है। इस पेज पर आपको आज मध्य प्रदेश राज्य के Narsinghpur जिले में तिल के मंडी भाव की जानकारी मिलेगी। हमारे यहाँ पर आप मध्य प्रदेश की सभी बड़ी व छोटी मंडी में सभी प्रकार के फल, सब्ज़ी, एवं अनाज के भाव की जानकारी ले सकते हैं।
Narsinghpur में तिल मंडी भाव का सारांश
| कमोडिटी | |
| औसत भाव | ₹4,737 क्विंटल |
| न्यूनतम भाव | ₹3,500 क्विंटल ( छोटा छिन्द्वारा ) |
| अधिकतम भाव | ₹7,000 क्विंटल ( नरसिंहपुर ) |
ताज़ा जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश राज्य के Narsinghpur जिले की मंडियो में तिल का औसतन भाव ₹4,737 /क्विंटल हैं। पिछले एक सप्ताह में सबसे कम भाव छोटा छिन्द्वारा मंडी में ₹3,500 /क्विंटल रहा, जबकि सबसे अधिक भाव नरसिंहपुर मंडी में ₹7,000 /क्विंटल रहा। मंडी भाव इंडिया पर मध्य प्रदेश राज्य के Narsinghpur जिले की 9 मंडियो के तिल के भाव दिए गये है।
ये डाटा आख़िरी बार 22 अप्रैल 2025 को अपडेट किया गया है।
आज Narsinghpur जिले में तिल का मंडी भाव - सभी मंडियां
| कमोडिटी | ज़िला | मंडी | तिल भाव | अप्डेट |
|---|---|---|---|---|
| तिल | Narsinghpur | नरसिंहपुर (Narsinghpur) | 7000 से 7000 ₹क्विंटल | 22 Apr 2025 |
| तिल | Narsinghpur | नरसिंहपुर (Narsinghpur) | 5406 से 5801 ₹क्विंटल | 10 Dec 2021 |
| तिल | Narsinghpur | पलोटन गंज (Gadarwara) | 6300 से 6300 ₹क्विंटल | 12 Jan 2021 |
| तिल | Narsinghpur | छोटा छिन्द्वारा (Chhota Chhindwara) | 3500 से 3800 ₹क्विंटल | 8 Jan 2011 |
| तिल | Narsinghpur | करेली (Kareli) | 4425 से 4500 ₹क्विंटल | 17 Nov 2009 |
| तिल | Narsinghpur | नरसिंहपुर (Narsinghpur) | 4000 से 4000 ₹क्विंटल | 6 Mar 2009 |
| तिल | Narsinghpur | करेली (Kareli) | 4000 से 4000 ₹क्विंटल | 6 Mar 2009 |
| तिल | Narsinghpur | छोटा छिन्द्वारा (Chhota Chhindwara) | 4000 से 4000 ₹क्विंटल | 6 Mar 2009 |
| तिल | Narsinghpur | पलोटन गंज (Gadarwara) | 4000 से 4000 ₹क्विंटल | 6 Mar 2009 |
Notes*
- सभी मंडी भाव 100 किलोग्राम के हिसाब से हैं
- भाव में परिवर्तन हो सकता है।
- ये भाव केवल आज के मंडी बाजार की स्थिति को इंगित करती हैं
तिल एक पुष्पीय पौधा है। तिल के बीज से खाद्य तेल निकाला जाता है। तिल को विश्व का सबसे पहला तिलहन माना जाता है। इसकी खेती 5000 साल पहले शुरू हुई थी। भारत मे तिल दो प्रकार का होता है -सफेद और काला। हिन्दू धर्म मे तिल का बहुत महत्व है। पूजा में तिल के तेल का प्रयोग किया जाता है और पितरों के तर्पण में तिल का प्रयोग होता है। तिल की खेती साल में तीन बार की जा सकती है।तिल से कई प्रकार की मिठाई, गजक, लड्डू आदि बनाए जाते हैं। तिल में मिलने वाले तत्व विटामिन बी, कैल्शियम, लिनोलिक अम्ल और फास्फोरस पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। तिल कोलेस्ट्रोल घटाने में भी सहायक है। तिल के तेल को तेलों की रानी कहा जाता है। तिल के लिए शीतोष्ण जलवायु अच्छी रहती है। ज्यादा बरसात या सूखा पड़ने पर इसकी फसल सही नहीं होती है। इसके लिए हल्की दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा इसे बलुई दोमट और काली मिट्टी में भी उगाया जा सकता है।
भारत में तिल की खेती - भारत के विभिन्न राज्यों में तिल की खेती की जाती है जैसे महाराष्ट्र,राजस्थान,पश्चिम बंगाल,आंध्र प्रदेश,गुजरात, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश,मध्य प्रदेश और तेलंगाना। तिल का सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में किया जाता है।
तिल की उन्नत किस्मे – टी के जी 308, जवाहर तिल 306, जे टी यस 8, टी के जी 55, आर टी 46, आर टी 125 आदि तिल की कुछ उन्नत किस्मे है।